THE ORIENTAL INSURANCE COMPANY LTD. vs SMT. SALMA KHAN
- Court
- Chhattisgarh High Court
1 / 6
{MA(C) No. 2308 of 2024}
CGHC010412222024 2026:CGHC:44732
अप्रतिवेद्य
छत्तीसगढ़ उच्च न्यायालय , बिलासपुर
विविध अपील ( प्रतिकर ) क्रमांक -2308 /2024
दि ओरिएंटल इंश्योरेंस कंपनी लिमिटेड (गलत रूप से दि ओरिएंटल जनरल इंश्योरेंस
कंपनी लिमिटेड के नाम से वर्णित), द्वारा शाखा प्रबंधक, होटल लक्ष्मण एवेन्यू, मूर्ति
लाइन कृषि मंडी के सामने, जगदलपुर, जिला बस्तर, छत्तीसगढ़
(दोषी वाहन मोटरसाइकिल क्रमांक सी.जी.-17-के.के.-1433 की बीमा कंपनी)
-----अपीलार्थी
विरूद्घ
1.
श्रीमती सलमा खान, पति स्वर्गीय अब्दुल रहीम खान, आयु लगभग 47 वर्ष,
2.
मोहम्मद जावेद खान, पिता स्वर्गीय अब्दुल रहीम खान, आयु लगभग 19 वर्ष,
3. कु. नाजिया खान, पिता स्वर्गीय अब्दुल रहीम खान, आयु लगभग 18 वर्ष (इंजीनियरिंग
की छात्रा),
4. मोहम्मद इस्माइल, पिता स्वर्गीय मोहम्मद इब्राहिम, आयु लगभग 78 वर्ष,
5. श्रीमती मोहराबी शेख, पति मोहम्मद इस्माइल, आयु लगभग 74 वर्ष,
सभी निवासी सनसिटी, चंद्रशेखर वार्ड, सूर्य मंदिर के पास, जगदलपुर, जिला बस्तर,
छत्तीसगढ़,
-----दावाकर्तागण
6. सचिन जायसवाल, पिता राजेश जायसवाल, आयु लगभग 20 वर्ष, व्यवसाय-छात्र,
मेडिकल कॉलेज, वर्तमान निवासी डिमरापाल, मेडिकल कॉलेज बॉयज हॉस्टल, कमरा
क्रमांक 318, गीदम रोड, थाना परपा, जिला बस्तर, छत्तीसगढ़
(दोषी वाहन मोटरसाइकिल क्रमांक सी.जी.-17-के.के.-1433 का चालक-सह-
स्वामी)
-----प्रत्यर्थीगण
Digitally
signed by
POMAN
DEWANGAN
Date:
2026.10.16
13:05:06
+0530
POMAN
DEWANGAN
2 / 6
{MA(C) No. 2308 of 2024}
अपीलार्थी/बीमा कंपनी द्वारा : श्री आर.एन. पुस्टी एवं श्री आकाश श्रीवास्तव,
अधिवक्तागण ।
दावाकर्ता/प्रत्यर्थी क्रमांक-1 से 5 द्वारा : श्री प्रवीध धुरंधर, अधिवक्ता ।
चालक-स्वामी/प्रत्यर्थी क्रमांक-6 द्वारा : सूचना अदम तामिल ।
न्यायमूर्ति श्री संजय कुमार जायसवाल
!! निर्णय पीठ पर पारित !!
15/10/2026
1. मोटर यान अधिनियम, 1988 की धारा 173 के अंतर्गत प्रस्तुत इस अपील में प्रथम अपर
मोटर दुर्घटना दावा अधिकरण, जगदलपुर, जिला-बस्तर (छत्तीसगढ़) द्वारा दावा प्रकरण
क्रमांक 74/2016, “श्रीमती सलमा खान वगैरह विरुद्ध सचिन जायसवाल वगैरह” में
पारित अधिनिर्णय दिनांक 24/07/2024 को चुनौती दी गई है । उक्त अधिनिर्णय को
आगे संक्षेप में “प्रश्नाधीन अधिनिर्णय” से संबोधित किया जा रहा है ।
2. प्रकरण के तथ्य, संक्षेप में, इस प्रकार हैं कि अब्दुल रहिम (मृतक) दिनांक 02/01/
2016 को अपनी मोटरसाइकिल से डिमरापाल, मेडिकल कॉलेज के सामने से जा रहा था ।
उसी समय सचिन जायसवाल मोटरसाइकिल क्रमांक सी.जी.-17-के.के.-1433 (जिसे
आगे संक्षेप में “दोषी वाहन” से सम्बोधित किया जा रहा है) को तेज गति एवं
लापरवाहीपूर्वक चलाते हुए आया, जिसकी ठोकर के फलस्वरूप आई गंभीर चोटों के कारण
अब्दुल रहिम को अस्पताल ले जाया गया, जहां उपचार के दौरान उसकी मृत्यु हो गई ।
उक्त घटना के संबंध में थाना परपा, जिला बस्तर, छत्तीसगढ़ में अपराध क्रमांक 02/
2016 अंतर्गत धारा 304(क) भारतीय दण्ड संहिता में अपराध पंजीबद्ध किया गया ।
3 / 6
{MA(C) No. 2308 of 2024}
3.
मृतक अब्दुल रहिम की उक्त दुर्घटना में मृत्यु के फलस्वरूप उसकी पत्नी, दो संतान एवं
माता-पिता द्वारा मोटर यान अधिनियम की धारा 166 के अंतर्गत प्रतिकर की मांग करते
हुए दावा आवेदन प्रस्तुत किया गया । जिस पर विधिवत सुनवाई के पश्चात अधिकरण
द्वारा “प्रश्नाधीन अधिनिर्णय” पारित किया गया तथा दावाकर्तागण के पक्ष में
₹44,02,252/- की प्रतिकर राशि ब्याज सहित अधिनिर्णीत की गई, जिसमें “दोषी
वाहन“ की अपीलार्थी-बीमा कंपनी को उत्तरदायी ठहराया गया है । उक्त निष्कर्ष को
अपीलार्थी-बीमा कंपनी द्वारा इस अपील में चुनौती दी गई है ।
4. अपीलार्थी-बीमा कंपनी के विद्वान अधिवक्ता का तर्क है कि उनके द्वारा मृतक अब्दुल रहिम
की योगदायी उपेक्षा का अभिवचन किया गया था, जिसे अधिकरण द्वारा मान्य नहीं किया
गया है, जबकि उनकी ओर से इस संबंध में कंपनी के प्रशासनिक अधिकारी शिव
सुब्रहमणयम अययर (अनावेदक साक्षी क्रमांक-1) एवं अन्वेषक अमरेन्द्र कुमार दीक्षित
(अनावेदक साक्षी क्रमांक-2) का परीक्षण कराया गया है । उनके द्वारा “दोषी वाहन“ के
चालक सचिन जायसवाल द्वारा दर्ज कराई गई शिकायत पर पुलिस द्वारा दर्ज प्रथम सूचना
पत्र तथा उस पर की गई विवेचना से संबंधित दस्तावेजी साक्ष्य प्रदर्श एन.ए.-2 से एन.ए.-
18 तक प्रस्तुत किए गए हैं । उक्त रिपोर्ट मृतक अब्दुल रहिम के विरुद्ध दर्ज की गई थी,
किंतु उसकी मृत्यु हो जाने के कारण पुलिस द्वारा उसमें खात्मा किया गया है । उनका तर्क
है कि दुर्घटना में अब्दुल रहिम की भी योगदायी उपेक्षा थी । अतः उसकी योगदायी उपेक्षा
मान्य करते हुए उसके विरुद्ध पारित अधिनिर्णय को यथाआवश्यक संशोधित किया जाए ।
5. दावाकर्ता/प्रत्यर्थी क्रमांक 1 से 5 के विद्वान अधिवक्ता ने अपील का विरोध करते हुए तर्क
प्रस्तुत किया है कि मृतक अब्दुल रहिम की कोई योगदायी उपेक्षा नहीं थी, बल्कि दुर्घटना
4 / 6
{MA(C) No. 2308 of 2024}
के लिए पूर्ण रूप से “दोषी वाहन“ का चालक सचिन जायसवाल उत्तरदायी रहा है । मृतक
अब्दुल रहिम की योगदायी उपेक्षा को प्रमाणित करने के लिए अपीलार्थी-बीमा कंपनी
अथवा “दोषी वाहन“ के चालक/स्वामी की ओर से कोई विश्वसनीय एवं ग्राह्य साक्ष्य
प्रस्तुत नहीं किया गया है । अधिकरण द्वारा अभिलेख पर उपलब्ध मौखि क एवं दस्तावेजी
साक्ष्य का समुचित मूल्यांकन करने के पश्चात विधिसम्मत निष्कर्ष अभिलिखि त किया गया
है । अपीलार्थी-बीमा कंपनी का तर्क स्वीकार किए जाने योग्य नहीं है । अतः अपील
खारिज किए जाने का निवेदन किया गया है ।
6. उपस्थि त पक्ष के तर्क श्रवण किए गए तथा अभिलेख का सूक्ष्मतापूर्वक परिशीलन किया
गया ।
7. समग्र अभिलेख के परिशीलन से यह स्थि ति स्पष्ट होती है कि मौके के साक्षी के रूप में
अब्दुल अमीन (आवेदक साक्षी क्रमांक-2) का परीक्षण दावाकर्ता पक्ष की ओर से कराया
गया है । अब्दुल अमीन पुलिस द्वारा प्रस्तुत अंतिम प्रतिवेदन प्रदर्श एन.ए.-10 के अनुसार
सूचीबद्ध साक्षी है तथा उसने अपने न्यायालयीन कथन में इस तथ्य की पुष्टि की है कि
दुर्घटना “दोषी वाहन“ के चालक सचिन जायसवाल द्वारा वाहन को उपेक्षापूर्वक एवं
उतावलेपन से चलाए जाने के कारण हुई थी । उक्त कथन का कोई प्रभावी खण्डन नहीं
किया जा सका है । बल्कि अब्दुल अमीन का कथन दावाकर्ता पक्ष की ओर से प्रस्तुत
पुलिस के चालानी दस्तावेजों की प्रतिलिपियां, प्रदर्श ए-1 से ए-10, से समर्थित है, जिनके
अनुसार “दोषी वाहन“ के चालक सचिन जायसवाल की उपेक्षा एवं उतावलेपन के कारण
दुर्घटना होना दर्शित है ।
5 / 6
{MA(C) No. 2308 of 2024}
8.
दूसरी ओर, अपीलार्थी-बीमा कंपनी की ओर से प्रस्तुत साक्ष्य के अवलोकन से यह
परिलक्षित होता है कि कंपनी के प्रशासनिक अधिकारी शिव सुब्रहमणयम अययर ने बीमा
पॉलिसी प्रदर्श एन.ए.-1 प्रस्तुत की है तथा अपने कंपनी के अन्वेषक से विवेचना कराया
जाना बताया है । अन्वेषक के रूप में अमरेन्द्र कुमार दीक्षित ने अपने साक्ष्य में अन्वेषण
प्रतिवेदन प्रदर्श एन.ए.-3 का उल्लेख करते हुए कहा है कि उसने दुर्घटना से संबंधित
आपराधिक प्रकरण के दस्तावेजों की प्रमाणित प्रतिलिपियां प्राप्त की थीं । दस्तावेजों के
रूप में उक्त साक्षी ने “दोषी वाहन“ के चालक सचिन जायसवाल द्वारा लिखाई गई रिपोर्ट के
आधार पर पुलिस द्वारा की गई विवेचना में संकलित प्रदर्श एन.ए.-5 से प्रदर्श एन.ए.-18
तक के दस्तावेज प्रस्तुत किए हैं ।
9. उल्लेखनीय है कि कंपनी का विधिक अधिकारी शिव सुब्रहमणयम अययर न तो मौके का
साक्षी है और न ही उसने स्वयं किसी प्रकार की विवेचना की है । अतः योगदायी उपेक्षा के
विषय में उसकी साक्ष्य का विधिक महत्व नहीं है । इसी प्रकार, अमरेन्द्र कुमार दीक्षित, जो
कंपनी का अन्वेषक है, द्वारा प्रस्तुत किए गए दस्तावेज पुलिस विवेचना से संबंधित
दस्तावेज हैं और उन्हें प्रमाणित करने हेतु अन्वेषक अमरेन्द्र कुमार दीक्षित को सक्षम साक्षी
नहीं कहा जा सकता । पुलिस विवेचना में संकलित साक्ष्य का प्रतिपादन विवेचक द्वारा
किया जा सकता है अथवा जिस व्यक्ति ने पुलिस में शिकायत दर्ज कराई हो या कथन दिया
हो, उसे न्यायालय के समक्ष साक्षी के रूप में प्रस्तुत किया जाना आवश्यक था, जो इस
मामले में नहीं किया गया है ।
10. योगदायी उपेक्षा को स्पष्ट रूप से स्थापित करने हेतु प्रमुख साक्षी “दोषी वाहन“ का चालक
सचिन जायसवाल हो सकता था, जो उपलब्ध भी था, किंतु अपीलार्थी-बीमा कंपनी द्वारा
6 / 6
{MA(C) No. 2308 of 2024}
उसे साक्षी के रूप में आहूत नहीं किया गया । अपीलार्थी-बीमा कंपनी की ओर से ऐसा
कोई साक्ष्य भी प्रस्तुत नहीं किया गया है, जिसे साक्ष्य विधि के अंतर्गत ग्राह्य मानते हुए
निर्णय में विचारणीय बनाया जा सके । इस प्रकार, अपीलार्थी-बीमा कंपनी की ओर से
प्रस्तुत दस्तावेजों एवं साक्ष्य का योगदायी उपेक्षा के प्रश्न पर अपेक्षित विधिक महत्व नहीं
है । पर्याप्त एवं ग्राह्य साक्ष्य के अभाव में अपीलार्थी-बीमा कंपनी यह स्थापित करने में
असफल रही है कि मृतक अब्दुल रहिम की दुर्घटना में कोई योगदायी उपेक्षा थी ।
11. इस प्रकार, उपरोक्त विवेचना के आधार पर यह न्यायालय पाती है कि अपीलार्थी-बीमा
कंपनी का तर्क स्वीकार किए जाने योग्य नहीं है । अधिकरण द्वारा पारित “प्रश्नाधीन
अधिनिर्णय” अभिलेख पर उपलब्ध मौखि क एवं दस्तावेजी साक्ष्य के अनुरूप होने से उसमें
किसी हस्तक्षेप की आवश्यकता नहीं पायी जाती । फलस्वरूप, अपील स्वीकार योग्य नहीं
होने से खारिज की जाती है ।
12. निर्णय की प्रति के साथ अधिकरण का अभिलेख शीघ्रतापूर्वक आवश्यक कार्यवाही हेतु
सूचनार्थ व पालनार्थ वापस प्रेषित हो ।
सही/-
(संजय कुमार जायसवाल)
न्यायाधीश
पोमन