TATA A.I.G. GENERAL INSURANCE COMPANY LIMITED vs SMT. JAN BAI

Court
Chhattisgarh High Court

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{MA(C) No. 833 of 2024}

CGHC010123102024 2026:CGHC:45832
अप्रतिवेद्य
छत्तीसगढ़ उच्च न्यायालय , बिलासपुर
विविध अपील ( प्रतिकर ) क्रमांक -833 /2024

टाटा ए.आई.जी. जनरल इंश्योरेंस कंपनी लिमिटेड, द्वारा विधिक प्रबंधक, कार्यालय
क्रमांक 403, चतुर्थ तल, डी.बी. सिटी कॉर्पोरेट पार्क, फ्लैट क्रमांक 1, ब्लॉक क्रमांक
09, राजबंधा मैदान, रायपुर (छत्तीसगढ़) ।
(दोषी वाहन मोटरसाइकिल क्रमांक सी.जी.-12-बी.डी.-4521 की बीमा कंपनी)
-----अपीलार्थी
विरूद्घ
1. श्रीमती जान बाई, पति स्वर्गीय मनोज कुमार, आयु लगभग 27 वर्ष,
2. कु. आंचल, पिता स्वर्गीय मनोज कुमार, आयु लगभग 8 वर्ष,
3. नवीन कुमार जगत, पिता स्वर्गीय मनोज कुमार, आयु लगभग 3 वर्ष,
4. नर्मदा बाई, पत्नी स्वर्गीय कांशी राम जगत, आयु लगभग 61 वर्ष,
प्रत्यर्थी क्रमांक-2 व 3 नाबालिग, द्वारा अपनी प्राकृतिक संरक्षक माता श्रीमती जान बाई ।
उक्त सभी निवासी -सेंदरीपाली, तहसील एवं थाना-पाली, जिला-कोरबा, छत्तीसगढ़,
-----दावाकर्तागण
5. खि लावन सिंह, पिता रमेश्वर सिंह, आयु लगभग 26 वर्ष, निवासी झाबर, थाना-दीपका,
जिला-कोरबा (छत्तीसगढ़) ।
(दोषी वाहन मोटरसाइकिल क्रमांक सी.जी.-12-बी.डी.-4521 का चालक)
6. रामेश्वर सिंह, पिता जगत राम, निवासी झाबर, थाना-दीपका, जिला-कोरबा
(छत्तीसगढ़)।
(दोषी वाहन मोटरसाइकिल क्रमांक सी.जी.-12-बी.डी.-4521 का स्वामी)
-----प्रत्यर्थीगण
Digitally
signed by
POMAN
DEWANGAN
Date:
2026.10.30
10:38:19
+0530
POMAN
DEWANGAN

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अपीलार्थी/बीमा कंपनी द्वारा : श्री सौरभ गुप्ता, अधिवक्ता ।
दावाकर्तागण/प्रत्यर्थी क्रमांक-1 से 4 द्वारा : कोई उपस्थि त नहीं ।
चालक/प्रत्यर्थी क्रमांक-5 द्वारा : कोई उपस्थि त नहीं ।
स्वामी/प्रत्यर्थी क्रमांक-6 द्वारा : कोई उपस्थि त नहीं ।
न्यायमूर्ति श्री संजय कुमार जायसवाल
!! निर्णय पीठ पर पारित !!
29/10/2026
1. मोटर यान अधिनियम, 1988 की धारा 173 के अंतर्गत प्रस्तुत इस अपील में प्रथम अपर
मोटर दुर्घटना दावा अधिकरण, कटघोरा, जिला-कोरबा (छत्तीसगढ़) द्वारा मोटर दुर्घटना
दावा प्रकरण क्रमांक 27/2022, “श्रीमती जान बाई वगैरह विरुद्ध खि लावन सिंह वगैरह”
में पारित अधिनिर्णय दिनांक 17/01/2024 को चुनौती दी गई है । उक्त अधिनिर्णय को
आगे संक्षेप में “प्रश्नाधीन अधिनिर्णय” से संबोधित किया जा रहा है ।
2. प्रकरण के तथ्य, संक्षेप में, इस प्रकार हैं कि मनोज कुमार जगत (मृतक) दिनांक
16/11/2021 को शाम करीब 05.30 बजे अपनी मोटरसाइकिल से दीपका से वापस
अपने घर सेन्द्रीपाली आ रहा था । तभी ग्राम रैनपुर सराई नाला के पास सामने से
खि लावन सिंह मोटरसाइकिल क्रमांक सी.जी.-12-बी.डी.-4521 (जिसे आगे संक्षेप में
“दोषी वाहन” से संबोधित किया जा रहा है) को तेज गति एवं लापरवाहीपूर्वक चलाते हुए
आया, जिसकी ठोकर के फलस्वरूप आई गंभीर चोटों के कारण मनोज कुमार जगत को
अस्पताल ले जाया गया, जहां उपचार के दौरान उसकी मृत्यु हो गई । उक्त घटना के संबंध
में थाना दीपका, जिला कोरबा, छत्तीसगढ़ में अपराध क्रमांक 312/2021 अंतर्गत धारा

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304(क) भारतीय दण्ड संहिता के तहत अपराध पंजीबद्ध किया गया तथा विवेचना उपरांत
अभियोगपत्र प्रस्तुत किया गया ।
3. मृतक मनोज कुमार जगत की उक्त दुर्घटना में मृत्यु के फलस्वरूप उसकी पत्नी, दो संतानों
एवं माता द्वारा मोटर यान अधिनियम की धारा 166 के अंतर्गत प्रतिकर की मांग करते हुए
दावा आवेदन प्रस्तुत किया गया । जिस पर विधिवत सुनवाई के पश्चात अधिकरण द्वारा
“प्रश्नाधीन अधिनिर्णय” पारित किया गया, जिसमें यह पाया गया कि दोषी वाहन
अपीलार्थी-बीमा कंपनी से बीमित रही है, किसी बीमा शर्त का उल्लंघन प्रमाणित नहीं हुआ
है तथा चालक खि लावन सिंह की उपेक्षा एवं उतावलेपन से दुर्घटना होना पाते हुए
दावाकर्तागण के पक्ष में ₹19,01,541/- की प्रतिकर राशि ब्याज सहित अधिनिर्णीत की
गई है, जिसे अपीलार्थी-बीमा कंपनी द्वारा इस अपील में चुनौती दी गई है ।
4. अपीलार्थी-बीमा कंपनी के विद्वान अधिवक्ता का तर्क है कि उक्त दुर्घटना में दोषी वाहन की
कोई संलिप्तता नहीं रही है, बल्कि वस्तुस्थि ति यह है कि प्रत्यर्थी खि लावन सिंह कथित
दोषी वाहन मोटरसाइकिल को चलाते हुए जब घटनास्थल पर पहुंचा, तब तक दुर्घटना हो
चुकी थी । मनोज कुमार जगत का पेट फट गया था तथा दुर्घटना किसी भारी वाहन से हुई
थी । जिसे देखकर खि लावन सिंह मौके पर बेहोश हो गया और उसके विरुद्ध झूठा अपराध
कायम किया गया । उसके द्वारा पुलिस अधीक्षक के समक्ष प्रदर्श डी-1 की शिकायत भी
दर्ज कराई गई थी, क्योंकि उसे दुर्घटना में झूठा आलिप्त किया गया था । इसके बावजूद
उसके विरुद्ध अभियोगपत्र प्रस्तुत किया गया है और उसके विरुद्ध अधिनिर्णय पारित किया
गया है । चूंकि दोषी वाहन से दुर्घटना नहीं हुई है, इसलिए बीमा कंपनी उत्तरदायी नहीं है ।
अतः अपील स्वीकार कर बीमा कंपनी को उत्तरदायित्व से मुक्त किया जाए ।

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5. उपस्थि त पक्ष के तर्क श्रवण किए गए तथा अभिलेख का सूक्ष्मतापूर्वक परिशीलन किया
गया ।
6. समग्र अभिलेख के परिशीलन से यह स्थि ति स्पष्ट है कि उक्त दुर्घटना के संबंध में दावाकर्ता
पक्ष की ओर से मौके के साक्षी के रूप में चंद्र प्रकाश खैरवार का परीक्षण कराया गया है ।
उसने दावाकर्ता पक्ष की ओर से प्रस्तुत पुलिस के अभियोगपत्र से संबंधित प्रमाणित
दस्तावेजों की प्रतिलिपियां, जो प्रदर्श पी-1 से प्रदर्श पी-9 तक हैं, की पुष्टि करते हुए
बताया है कि दोषी वाहन के चालक खि लावन सिंह द्वारा वाहन को उपेक्षा एवं उतावलेपन से
चलाए जाने के फलस्वरूप दुर्घटना हुई थी, जिसमें ठोकर लगने से मनोज कुमार जगत की
मृत्यु हुई थी । प्रतिपरीक्षण में आए तथ्यों से यह स्पष्ट होता है कि यह साक्षी पुलिस द्वारा
प्रस्तुत अभियोगपत्र के अनुसार सूचीबद्ध साक्षी नहीं है, किंतु अन्य विषयों पर इस साक्षी के
कथन का खण्डन नहीं हो सका है, बल्कि पुलिस द्वारा प्रस्तुत अंतिम प्रतिवेदन की पुष्टि ही
होती है ।
7. दूसरी ओर, दोषी वाहन के चालक के रूप में खि लावन सिंह स्वयं परीक्षित हुआ है, जिसने
पुलिस अधीक्षक को प्रदर्श डी-1 की शिकायत दिनांक 30/09/2022 को, अर्थात
घटना के करीब 10 माह पश्चात, किए जाने के संबंध में बताते हुए कहा है कि दुर्घटना
किसी ट्रेलर से हुई थी, जो फरार हो गया था । वह पश्चात में घटनास्थल पर पहुंचा था
और छत-विछत शव को देखकर बेहोश हो गया था । उसके वाहन से कोई दुर्घटना नहीं
हुई, बल्कि उसे झूठा आलिप्त किया गया है ।
8. महत्वपूर्ण रूप से उल्लेखनीय तथ्य यह है कि मामले में प्रथम सूचना पत्र प्रदर्श पी-2 दुर्घटना
के दिन ही दर्ज किया गया है, जो दोषी वाहन के चालक के विरुद्ध ही दर्ज है । इस प्रकार

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प्रथम सूचना पत्र दर्ज किए जाने में किसी विलंब की स्थि ति नहीं है, जबकि दोषी वाहन के
चालक के रूप में खि लावन सिंह द्वारा पुलिस अधीक्षक को प्रदर्श डी-1 की शिकायत घटना
के करीब 10 माह पश्चात की गई है, जिस विलंब का कोई भी स्पष्टीकरण नहीं दिया गया
लावन सिंह ने अपने बयान
है । उक्त शिकायत में ट्रेलर का कोई उल्लेख नहीं है, जबकि खि
में ट्रेलर से दुर्घटना होने का कथन किया है । इससे प्रकट होता है कि खि लावन सिंह का
बचाव सोच-समझकर और बिना किसी आधार के लिया गया बचाव है । जिसके संबंध में
मौके के साक्षी के रूप में दावाकर्ता पक्ष की ओर से परीक्षित चंद्र प्रकाश खैरवार के
प्रतिपरीक्षण के दौरान कोई सुझाव भी नहीं दिया गया है । ऐसी दशा में खि लावन सिंह का
बचाव विश्वसनीय नहीं पाया जाता और दावाकर्ता पक्ष की ओर से प्रस्तुत साक्ष्य तथा
पुलिस के अभियोगपत्र पर अविश्वास करने का कोई कारण नहीं पाया जाता ।
9. उपरोक्त विवेचना के आधार पर यह न्यायालय पाती है कि अपीलार्थी-बीमा कंपनी का तर्क
स्वीकार किए जाने योग्य नहीं है । अधिकरण द्वारा पारित “प्रश्नाधीन अधिनिर्णय”
अभिलेख पर उपलब्ध मौखि क एवं दस्तावेजी साक्ष्य के अनुरूप होने से उसमें किसी
हस्तक्षेप की आवश्यकता नहीं पायी जाती । फलस्वरूप, अपील स्वीकार योग्य नहीं होने
से खारिज की जाती है ।
10. निर्णय की प्रति के साथ अधिकरण का अभिलेख शीघ्रतापूर्वक आवश्यक कार्यवाही हेतु
सूचनार्थ व पालनार्थ वापस प्रेषित हो ।
सही/-
(संजय कुमार जायसवाल)
न्यायाधीश
पोमन