A. ARUNA JYOTI vs PILESHWAR KUMAR

Court
Chhattisgarh High Court

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{MA(C) No. 1038 of 2024}

CGHC010167612024 2026:CGHC:45858
अप्रतिवेद्य
छत्तीसगढ़ उच्च न्यायालय , बिलासपुर
विविध अपील ( प्रतिकर ) क्रमांक -1038 /2024
1. ए. अरुणा ज्योति, पति स्वर्गीय ए. उमा महेश्वर राव, आयु लगभग 46 वर्ष,
2. कु. ए. कृष्णा वेणी, पिता स्वर्गीय ए. उमा महेश्वर राव, आयु लगभग 24 वर्ष,
3. कु. ए. हरि प्रिया, पिता स्वर्गीय ए. उमा महेश्वर राव, आयु लगभग 20 वर्ष,
4. अरिक्तोटा कार्तिक, पिता स्वर्गीय ए. उमा महेश्वर राव, आयु लगभग 18 वर्ष,
5. अरिक्तोटा कमला कुमारी, पत्नी स्वर्गीय अरिक्तोटा कृष्णमूर्ति, आयु लगभग 70 वर्ष,
सभी निवासी चरौदा (बी.एम.वाई.), थाना पुरानी भिलाई, तहसील पाटन, जिला दुर्ग
(छत्तीसगढ़) ।
-----अपीलार्थीगण/दावाकर्तागण
विरूद्घ
1.
पिलेश्वर कुमार, पिता सरवन कुमार, निवासी वार्ड क्रमांक 12, यादव किराना के पास,
दल्लीराजहरा (म.), जिला बालोद (छत्तीसगढ़) ।
(दोषी वाहन मोटरसाईकिल क्रमांक सी.जी.-07-ए.जेड.-5023 का चालक)
2. रतन लाल सुथार, पिता नेमी चंद सुथार, निवासी मकान क्रमांक 47, वार्ड क्रमांक 4,
एकलव्य नगर, संजारी, तहसील एवं जिला बालोद (छत्तीसगढ़) ।
(दोषी वाहन मोटरसाईकिल क्रमांक सी.जी.-07-ए.जेड.-5023 की स्वामी)
3. शाखा प्रबंधक, चोलामंडलम एच.एस. जनरल इंश्योरेंस कंपनी लिमिटेड, सिमरन टावर,
द्वितीय तल, एल.आई.सी. भवन के सामने, पंडरी बस स्टैंड के पास, रायपुर, जिला
रायपुर (छत्तीसगढ़) ।
(दोषी वाहन मोटरसाईकिल क्रमांक सी.जी.-07-ए.जेड.-5023 की बीमा कंपनी)
-----प्रत्यर्थीगण
Digitally
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POMAN
DEWANGAN
Date:
2026.10.30
14:39:49
+0530
POMAN
DEWANGAN

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अपीलार्थीगण/दावाकर्तागण द्वारा : श्री संजीव वर्मा, अधिवक्ता ।
चालक/प्रत्यर्थी क्रमांक-1 द्वारा :
श्री सविंद कुमार, अधिवक्ता ।
स्वामी/प्रत्यर्थी क्रमांक-2 द्वारा : सूचना अदम तामिल ।
बीमा कंपनी/प्रत्यर्थी क्रमांक-3 द्वारा : कोई उपस्थि त नहीं ।
न्यायमूर्ति श्री संजय कुमार जायसवाल
!! निर्णय पीठ पर पारित !!
29/10/2026
1. मोटर यान अधिनियम, 1988 की धारा 173 के अंतर्गत प्रस्तुत इस अपील में षष्ठम अपर
मोटर दुर्घटना दावा अधिकरण, दुर्ग, जिला-दुर्ग (छत्तीसगढ़) द्वारा मोटर दुर्घटना दावा
प्रकरण क्रमांक 185/2021, “ए. अरुणा ज्योति वगैरह विरुद्ध पिलेश्वर कुमार वगैरह” में
पारित अधिनिर्णय दिनांक 16/10/2023 को चुनौती दी गई है, जिसे आगे संक्षेप में
“प्रश्नाधीन अधिनिर्णय” से संबोधित किया जा रहा है ।
2. प्रकरण के तथ्य, संक्षेप में, इस प्रकार हैं कि ए. उमा महेश्वर राव (मृतक) दिनांक
13/12/2020 को शाम लगभग 04:30 बजे ड्यूटी समाप्त कर मोटरसाइकिल से अपने
घर चरौदा आ रहा था । जब वह चंदनडीह पुल के पास पहुंचा, तभी प्रत्यर्थी पिलेश्वर
कुमार ट्रक क्रमांक सी.जी.-07-ए.जेड.-5023 (जिसे आगे संक्षेप में “दोषी वाहन” से
संबोधित किया जा रहा है) को तेज गति एवं लापरवाहीपूर्वक चलाते हुए रायपुर से दुर्ग की
ओर आया और उसकी ठोकर से ए. उमा महेश्वर राव को गंभीर चोटें आईं । उसे
उपचारार्थ अस्पताल ले जाया गया, जहां उसकी मृत्यु हो गई । उक्त दुर्घटना के संबंध में
थाना-आमानाका, रायपुर में अपराध क्रमांक 218/2020 के अंतर्गत धारा 304(क)
भारतीय दण्ड संहिता के तहत अपराध पंजीबद्ध किया गया तथा विवेचना उपरांत
अभियोगपत्र प्रस्तुत किया गया ।

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3. मृतक ए. उमा महेश्वर राव की उक्त दुर्घटना में मृत्यु के फलस्वरूप उसकी पत्नी, तीन
संतान एवं माता द्वारा मोटर यान अधिनियम की धारा 166 के अंतर्गत प्रतिकर की मांग
करते हुए दावा आवेदन प्रस्तुत किया गया । जिस पर विधिवत सुनवाई के पश्चात
अधिकरण द्वारा “प्रश्नाधीन अधिनिर्णय” पारित किया गया तथा प्रत्यर्थीगण के विरुद्ध कुल
₹1,41,49,531/- की प्रतिकर राशि ब्याज सहित अधिनिर्णीत की गई । उक्त प्रतिकर
राशि में वृद्धि के लिए दावाकर्तागण की ओर से यह अपील प्रस्तुत की गई है ।
4. अपीलार्थी-दावाकर्तागण पक्ष के विद्वान अधिवक्ता का तर्क है कि ए. उमा महेश्वर राव
(मृतक) रेलवे विभाग में सीनियर पैसेंजर गार्ड के रूप में कार्यरत था, जिसका वेतन पर्ची
प्रदर्श पी-13 से पी-15 तथा प्रदर्श पी-18 से पी-23 के रूप में प्रस्तुत किया गया है ।
उक्त वेतन पर्चियों में के.एम.ए. भत्ते की राशि भी दर्शित है, किंतु अधिकरण द्वारा उसकी
समुचित गणना कर आय में सम्मि लित नहीं किया गया है । के.एम.ए. भत्ते की उचित गणना
नहीं किए जाने के कारण कम प्रतिकर अधिनिर्णीत हुआ है । अतः प्रतिकर राशि में वृद्धि
की जाए ।
5. इसके विपरीत, चालक/प्रत्यर्थी क्रमांक-1 के विद्वान अधिवक्ता ने अपील का विरोध करते
हुए तर्क प्रस्तुत किया कि अधिकरण द्वारा अभिलेख पर उपलब्ध मौखिक एवं दस्तावेजी
साक्ष्य का समुचित मूल्यांकन कर विधिसम्मत निष्कर्ष अभिलिखित किया गया है ।
अपीलार्थी पक्ष का तर्क स्वीकार किए जाने योग्य नहीं है । अतः अपील खारिज किया जाए ।
6. उपस्थि त पक्ष के तर्क श्रवण किए गए तथा अभिलेख का सूक्ष्मतापूर्वक परिशीलन किया गया ।
7. समग्र अभिलेख के परिशीलन से यह स्थि ति स्पष्ट होती है कि अधिकरण ने कण्डि का 20
एवं 21 में यह माना है कि मृतक की प्रदर्श पी-13 से पी-15 तथा प्रदर्श पी-18 से पी-23

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के रूप में प्रस्तुत वेतन पर्चियां कुल 09 माह की हैं । अधिकरण ने के.एम.ए. को छोड़कर
अन्य सभी भत्तों को मान्य किया है, क्योंकि के.एम.ए. प्रतिमाह समान रूप से देय नहीं होता
था, बल्कि प्रत्येक माह भिन्न-भिन्न राशि देय होती थी । वह इस बात पर निर्भर करता था
कि सीनियर पैसेंजर गार्ड के रूप में मृतक ने कितने घंटे तथा कितने दिन ड्यूटी की थी ।
अतः अधिकरण द्वारा वेतन पर्चियों में दर्शित के.एम.ए. मद की राशि को जोड़कर 12 माह
का औसत निकालते हुए ₹12,746/- की राशि मृतक की मासिक आय में जोड़ी गई है ।
इसके अतिरिक्त, वर्षभर में मिलने वाले वर्दी भत्ते की ₹5,000/- की राशि को भी जोड़ते
हुए मृतक की वार्षिक आय ₹15,14,788/- निर्धारित की गई है । उक्त आय के निर्धारण
में कोई त्रुटि परिलक्षित नहीं होती है । अभिलेख के परिशीलन से प्रतिकर राशि के अन्य
किसी मद में भी हस्तक्षेप की आवश्यकता प्रतीत नहीं होती है ।
8. उपरोक्त विवेचना के आधार पर यह न्यायालय पाती है कि अपीलार्थी पक्ष का तर्क स्वीकार
किए जाने योग्य नहीं है । अधिकरण द्वारा पारित “प्रश्नाधीन अधिनिर्णय” अभिलेख पर
उपलब्ध मौखि क एवं दस्तावेजी साक्ष्य के अनुरूप होने से उसमें किसी हस्तक्षेप की
आवश्यकता नहीं पायी जाती । फलस्वरूप, अपील स्वीकार योग्य नहीं होने से खारिज की
जाती है ।
9. निर्णय की प्रति के साथ अधिकरण का अभिलेख शीघ्रतापूर्वक आवश्यक कार्यवाही हेतु
सूचनार्थ व पालनार्थ वापस प्रेषित हो ।
सही/-
(संजय कुमार जायसवाल)
न्यायाधीश
पोमन