BANMALI RATHIYA vs STATE OF CHHATTISGARH

Court
Chhattisgarh High Court

1 / 6
(Cr. A. No.-1108 of 2026 & 1112 of 2026)

2026:CGHC:21702
अप्रतिवेद्य
छत्तीसगढ़ उच्च न्यायालय , बिलासपुर
दाण्डि क अपील क्रमांक -1108 /2026

चिनेश खम्हारी उर्फ कुनू पिता-कृष्णचंद खम्हारी, उम्र-लगभग 30 वर्ष, निवासी-मकान
संख्या-39, ग्राम-कोलतापारा, आमगांव, तहसील व जिला-रायगढ़, छत्तीसगढ़
-----अपीलार्थी/अभियुक्त
विरूद्घ

छत्तीसगढ़ राज्य, द्वारा थाना प्रभारी, पुलिस थाना-तमनार, जिला-रायगढ़, छत्तीसगढ़
-----उत्तरवादी/राज्य
एवं
दाण्डि क अपील क्रमांक -1112 /2026

बनमाली राठिया पिता-रूपसाय राठिया, उम्र-लगभग 35 वर्ष, निवासी-ग्राम झरना,
तमनार, धौराभाठा, तहसील व पुलिस थाना-तमनार, जिला-रायगढ़, छत्तीसगढ़
-----अपीलार्थी/अभियुक्त
विरूद्घ

छत्तीसगढ़ राज्य, द्वारा पुलिस थाना-तमनार, जिला-रायगढ़, छत्तीसगढ़
-----उत्तरवादी/राज्य
अपीलार्थी चिनेश खम्हारी उर्फ कुनू द्वारा : श्री हरि अग्रवाल, अधिवक्ता ।
अपीलार्थी बनमाली राठिया द्वारा : श्री मनोज कुमार सिन्हा, अधिवक्ता ।
राज्य/उत्तरवादी द्वारा : श्री रोहितास्व सिंह, उप शासकीय अधिवक्ता ।
Digitally
signed by
POMAN
DEWANGAN
Date:
2026.05.09
11:46:58
+0530
POMAN
DEWANGAN

2 / 6
(Cr. A. No.-1108 of 2026 & 1112 of 2026)
न्यायमूर्ति श्री संजय कुमार जायसवाल
!! आदेश पीठ पर पारित !!
08/05/2026
1. उपरोक्त दोनों अपीलें एक ही अपराध क्रमांक-309/2025 से उत्पन्न होने के कारण,
इनका निराकरण इस संयुक्त आदेश के माध्यम से किया जा रहा है ।
ii
2. धारा 14(क)( ) अनुसूचित जाति एवं अनुसूचित जनजाति (अत्याचार निवारण)
अधिनियम, 1989 (जिसे आगे संक्षेप में "विशेष अधिनियम" कहा गया है) के अंतर्गत
जमानत संबंधी प्रस्तुत प्रथम अपीलों में, विचारण न्यायालय-विशेष न्यायाधीश (विशेष
अधिनियम), रायगढ़, छत्तीसगढ़ द्वारा पुलिस थाना-तमनार, रायगढ़, छत्तीसगढ़ के
अपराध क्रमांक-309/2025 अंतर्गत धारा 296, 351(2), 115(2), 109(1),
221, 132, 74, 76, 309(4), 309(6), 3(5), 310(2), 121(1), 77,
v
351(3) भारतीय न्याय संहिता, 2023, विशेष अधिनियम की धारा 3(2)( ) तथा
सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम, 2008 की धारा-66, 67(क) के तहत प्रस्तुत नियमित
जमानत आवेदनों में पारित आदेश दिनांक 17/03/2026 एवं 04/04/2026 को
चुनौती दी गई है जिसके तहत अपीलार्थीगण/अभियुक्तगण का नियमित जमानत आवेदन
को निरस्त कर दिया गया । उक्त आदेशों को संक्षेप में “प्रश्नाधीन आदेश” से संबोधित
किया जा रहा है ।
3. अभियोजन मामला संक्षेप में इस प्रकार है कि पीड़िता थाना पूंजीपथरा, जिला रायगढ़
(छत्तीसगढ़) में महिला आरक्षक के पद पर पदस्थ है । तमनार थाना क्षेत्र, जिला रायगढ़
में स्थि त जिंदल कंपनी से संबंधित जनसुनवाई के विरोध में विभिन्न मुद्दों को लेकर लगभग
14 ग्रामों के ग्रामीण सी.एच.पी. चौक, लिबरा में धरना-प्रदर्शन कर रहे थे । उक्त प्रदर्शन

3 / 6
(Cr. A. No.-1108 of 2026 & 1112 of 2026)
के दौरान कानून-व्यवस्था बनाए रखने हेतु रायगढ़ जिले के विभिन्न थानों के पुलिस
अधिकारी-कर्मचारी तथा प्रशासनिक अधिकारियों की ड्यूटी लगाई गई थी । दिनांक
27.12.2025 को एकत्रित प्रदर्शनकारी, अन्य सह-अभियुक्तों जैसे राजेश मरकाम आदि
के उकसावे पर उग्र एवं हिंसक हो गए । उन्होंने पुलिस द्वारा शांति बनाए रखने की अपील
की उपेक्षा करते हुए अनियंत्रित होकर प्राणघातक हमला प्रारंभ कर दिए । प्रदर्शनकारियों
के हाथों में लाठी-डंडे आदि थे । इसी दौरान पीड़िता, जो महिला आरक्षक है, अपनी
सुरक्षा हेतु खेत की ओर भागी, किंतु गड्ढे में पैर फंसने से गिर पड़ी । तभी लगभग 7–8
प्रदर्शनकारियों ने उसे घेर लिया और उसकी हत्या करने की नियत से अश्लील गाली-
गलौज करते हुए तथा जान से मारने की धमकी देते हुए उस पर हाथ-मुक्कों, लात-घूसों
एवं लाठी-डंडों से प्रहार किया । पीड़िता की लज्जा भंग करने की नीयत से उसके दोनों
पैर उठाकर उसके वस्त्रों को गले एवं वक्षस्थल के पास से खींचकर फाड़ दिया तथा
अंतःवस्त्र को भी खींचते हुए उसे घसीटा । पीड़िता प्राणरक्षा हेतु बार-बार निवेदन करती
रही, परंतु उसकी वर्दी के कपड़े फाड़कर उस पर हँसते रहे । वह असहाय अवस्था में
अपने स्तनों को दोनों हाथों से ढंककर रोती-बिलखती रही । सह-अभियुक्त मंगल राठिया
द्वारा डंडे से उसकी पीठ पर प्रहार किया गया तथा अन्य व्यक्तियों द्वारा भी मारपीट की
गई । इसी बीच एक व्यक्ति द्वारा उसके अर्धनग्न अवस्था का वीडियो मोबाइल फोन से
बनाकर प्रसारित कर दिया गया । अभियुक्तगण ने उसका गला दबाकर जान से मारने का
प्रयास किया, जिससे वह किसी प्रकार अपने अंतःवस्त्र को छोड़कर जान बचाकर वहां से
भागने में सफल हुई । इसी घटना में महिला थाना प्रभारी तमनार, रायगढ़ के साथ भी
अश्लील गाली-गलौज एवं मारपीट की गई तथा उसके सिर को हाईवा वाहन से कुचलने
का प्रयास किया गया और उसे जान से मारने की धमकी दी गई । उक्त घटना की रिपोर्ट

4 / 6
(Cr. A. No.-1108 of 2026 & 1112 of 2026)
पर थाना तमनार, जिला रायगढ़ द्वारा अपराध पंजीबद्ध किया गया । तत्पश्चात् आहतों का
चिकित्सीय परीक्षण कराया गया, साक्षियों के कथन दर्ज किए गए तथा संपूर्ण विवेचना
उपरांत अभियुक्तगण के विरुद्ध अभियोग-पत्र प्रस्तुत किया गया ।
4.
इस अपील के संबंध में पीड़िता/शिकायतकर्ता द्वारा आभासी माध्यम से अपीलार्थीगण/
अभियुक्तगण को जमानत दिए जाने पर आपत्ति होने की अभिव्यक्ति की गई है ।
5.
अभियुक्त/आवेदक चिनेश खम्हारी उर्फ कुनू के विद्वान अधिवक्ता का तर्क है कि आवेदक
निर्दोष है तथा उसे इस प्रकरण में मिथ्या रूप से फंसाया गया है । प्रथम सूचना पत्र में
उसका नाम नहीं है । वह बी.टेक स्नातक है । उसके भाई गुलशन का संबंधित 14 ग्रामों
के ग्रामीण, जो विरोध कर रहे थे उसमें गुलशन की प्रत्यक्ष भूमिका थी इसलिए उसे,
गुलशन का भाई होने मात्र के आधार पर झूठा फंसाया गया है । उस पर मात्र एक वीडियो
बनाने का आरोप है । उससे सिर्फ मोबाईल जप्त हुआ है । आवेदक का कोई पूर्व
आपराधिक इतिहास नहीं है । वह दिनांक 02.01.2026 से अभिरक्षा में है । संपूर्ण
विवेचना उपरांत अभियोगपत्र प्रस्तुत किया जा चुका है । प्रकरण में 63 साक्षियों का
परीक्षण होना है, जिससे विचारण में समय लगना संभावित है । अतः उसे जमानत पर
रिहा किया जाए ।
6. अभियुक्त/आवेदक बनमाली राठिया के विद्वान अधिवक्ता का तर्क है कि आवेदक निर्दोष है
तथा उसे इस प्रकरण में मिथ्या रूप से फंसाया गया है । प्रथम सूचना पत्र में उसका नाम
नहीं है । आवेदक का कोई पूर्व आपराधिक इतिहास नहीं है । वह दिनांक 03.01.2026
से अभिरक्षा में है । संपूर्ण विवेचना उपरांत अभियोगपत्र प्रस्तुत किया जा चुका है ।
प्रकरण में 63 साक्षियों का परीक्षण होना है, जिससे विचारण में समय लगना संभावित है ।
अतः उसे जमानत पर रिहा किया जाए ।

5 / 6
(Cr. A. No.-1108 of 2026 & 1112 of 2026)
7.
उत्तरवादी/राज्य के विद्वान अधिवक्ता ने अभियुक्तगण के अपील का विरोध करते हुए यह
तर्क प्रस्तुत किया है कि अपीलार्थीगण/अभियुक्तगण की पहचान पीड़िता द्वारा शिनाख़्त
परेड में की गई है । केस डायरी के अनुसार संपूर्ण घटनाक्रम में उनकी सक्रिय संलिप्तता
रही है । अभियुक्त/आवेदक चिनेश खम्हारी उर्फ कुनू से मोबाईल फोन भी जप्त हुआ है ।
अभियुक्त/आवेदक बनमाली राठिया के बयान के मेमोरण्डम के आधार पर उससे डण्डे की
जप्ती की गई है । यह प्रकरण पुलिस एवं प्रशासन के विरुद्ध गंभीर अपराध का है, जबकि
कानून-व्यवस्था बनाए रखना उन्हीं का दायित्व है । ऐसे में कर्तव्य निर्वहन कर रही
महिला आरक्षक एवं थाना प्रभारी जो एक शासकीय सेवक है, के साथ गंभीर अपराध किया
जाना अत्यंत गंभीर परिस्थि ति को दर्शाता है । विचारण न्यायालय द्वारा पारित “प्रश्नाधीन
आदेश” उचित एवं विधिसम्मत है, जिसमें किसी प्रकार के हस्तक्षेप की आवश्यकता नहीं
है । अतः प्रस्तुत अपीलें खारिज की जाए ।
8. उभयपक्ष का तर्क श्रवण किया तथा अभिलेख एवं केस डायरी का परिशीलन किया गया ।
9.
अभिलेख के समग्र परिशीलन से यह स्थि ति स्पष्ट होती है कि पीड़िता जो पुलिस कर्मी रही
है उसके साथ जो घटनाक्रम हुआ है वह गंभीर प्रकृति का है । अभी विचारण प्रारंभ नहीं
हुआ है, पीड़िता का कथन न्यायालय में नहीं हुआ है । ऐसी दशा में, संपूर्ण स्थि ति को
दृष्टिगत रखते हुए अभियुक्त/आवेदक चिनेश खम्हारी उर्फ कुनू एवं बनमाली राठिया का
मामला इस स्तर पर नियमित जमानत हेतु उपयुक्त नहीं पाया जाता । विचारण न्यायालय
द्वारा पारित "प्रश्नाधीन आदेश" में कोई अवैधता अथवा अशुद्घता परिलक्षित नहीं होती है ।
अतः उसमें हस्तक्षेप किए जाने की आवश्यकता नहीं पाई जाती । अतः अपीलें खारिज की
जाती हैं ।

6 / 6
(Cr. A. No.-1108 of 2026 & 1112 of 2026)
10.
रजिस्ट्री को निर्देशित किया जाता है कि इस आदेश की प्रति यथाशीघ्र विचारण न्यायालय
को सूचनार्थ प्रेषित किया जाए ।
सही/-
(संजय कुमार जायसवाल)
न्यायाधीश
पोमन